Durga Puja 2025 Muhurat Date: शुभ समय, पूजा विधि और टॉप 5 खास बातें

Durga Puja 2025 Muhurat Date: शुभ समय, पूजा विधि और टॉप 5 खास बातें
दुर्गा पूजा 2025 में कब और कैसे करें – यह जानना हर भक्त के लिए जरूरी है। यह गाइड उन सभी के लिए है जो माँ दुर्गा की सही विधि से पूजा करना चाहते हैं और शुभ फल पाना चाहते हैं।
आप यहाँ जानेंगे दुर्गा पूजा 2025 के सही मुहूर्त और तारीखें, साथ ही पूजा की संपूर्ण विधि भी मिलेगी। हम आपको बताएंगे कि पूजा के लिए कौन सी चीजें चाहिए और दुर्गा पूजा की 5 सबसे खास बातें क्या हैं जो आपको जरूर जानना चाहिए। पूजा के बाद के नियम और इससे मिलने वाले फायदे भी शामिल हैं।
दुर्गा पूजा 2025 के शुभ मुहूर्त और तारीखें

मुख्य पूजा तिथियां और समय
साल 2025 में दुर्गा पूजा का पावन त्योहार 30 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। शारदीय नवरात्रि का आरंभ 21 सितंबर से होगा, जबकि मुख्य दुर्गा पूजा के दिन इस प्रकार हैं:
| तिथि | दिन | त्योहार |
|---|---|---|
| 30 सितंबर 2025 | मंगलवार | सप्तमी पूजा |
| 1 अक्टूबर 2025 | बुधवार | महाअष्टमी |
| 2 अक्टूबर 2025 | गुरुवार | महानवमी |
| 3 अक्टूबर 2025 | शुक्रवार | विजयादशमी |
षष्ठी तिथि 29 सितंबर से शुरू होकर बोधन और अधिवास की रस्म के साथ पूजा की शुरुआत होगी। प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
प्रत्येक दिन के विशेष मुहूर्त
सप्तमी (30 सितंबर): सुबह 6:15 से 7:45 तक प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त। शाम 5:30 से 7:00 तक संध्या आरती का विशेष समय।
महाअष्टमी (1 अक्टूबर): सुबह 5:45 से 7:15 तक षोडशोपचार पूजा। दोपहर 11:30 से 12:30 तक कुमारी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त। रात 11:45 से 12:24 तक संधि पूजा का अत्यंत महत्वपूर्ण समय।
महानवमी (2 अक्टूबर): प्रातःकाल 6:00 से 8:00 तक महानवमी पूजा। दोपहर 1:15 से 2:45 तक हवन और यज्ञ का उत्तम काल। शाम 6:15 से 7:30 तक महाआरती।
विजयादशमी (3 अक्टूबर): सुबह 6:30 से 8:15 तक अपराजिता पूजा। दोपहर 2:30 से 3:15 तक सिंदूर खेला और विसर्जन यात्रा का शुभ मुहूर्त।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सबसे शुभ समय
ग्रह नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर, इस वर्ष अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से दशमी तक का समय अत्यधिक शुभफलदायी है। गुरु ग्रह मीन राशि में और शुक्र तुला राशि में होने से धार्मिक कार्यों के लिए यह समय बेहद लाभकारी माना गया है।
मंगल ग्रह कर्क राशि में होने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए यह समय सर्वोत्तम है। राहु काल का ध्यान रखते हुए, दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक के समय में पूजा से बचना चाहिए। शनि की दृष्टि अनुकूल होने से शाम का समय विशेष रूप से मंगलकारी है।
चंद्र कैलेंडर के अनुसार तिथि निर्धारण
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 29 सितंबर दोपहर 12:06 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर दोपहर 2:22 तक रहेगी। सप्तमी तिथि 30 सितंबर दोपहर 2:22 से 1 अक्टूबर शाम 4:20 तक। अष्टमी तिथि 1 अक्टूबर शाम 4:20 से 2 अक्टूबर शाम 5:58 तक चलेगी।
नवमी तिथि 2 अक्टूबर शाम 5:58 से 3 अक्टूबर रात 7:18 तक रहेगी। दशमी तिथि 3 अक्टूबर रात 7:18 से शुरू होकर 4 अक्टूबर रात 8:21 तक चलेगी। चंद्रमा की गति के अनुसार ये सभी समय सटीक गणना पर आधारित हैं और पूजा की शुद्धता के लिए इनका पालन जरूरी है।
दुर्गा पूजा की संपूर्ण विधि और नियम

घट स्थापना की सही प्रक्रिया
घट स्थापना दुर्गा पूजा का सबसे महत्वपूर्ण चरण है जो पूरी पूजा की नींव रखता है। सबसे पहले एक साफ मिट्टी या तांबे का कलश लेकर उसमें गंगाजल या शुद्ध जल भरें। कलश में आम के पत्ते या बेल पत्र रखें और उसके ऊपर नारियल स्थापित करें।
घट स्थापना का सही समय सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक का होता है। कलश के नीचे सप्त धान्य (सात अनाज) बिखेरें और उसके चारों ओर पवित्र धागा बांधें। घट को पूर्व या उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है।
घट स्थापना की सामग्री:
- मिट्टी या तांबे का कलश
- गंगाजल या शुद्ध पानी
- आम के पत्ते या बेल पत्र
- नारियल (लाल कपड़े में लपेटा हुआ)
- सप्त धान्य
- रोली, चावल, फूल
दैनिक पूजा अनुष्ठान के चरण
दुर्गा पूजा में हर दिन की अपनी खास विधि होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा की शुरुआत करें। पहले घट और माता की प्रतिमा पर गंगाजल छिड़कें और साफ करें।
दैनिक पूजा के मुख्य चरण:
- आवाहन – माता दुर्गा का स्वागत करना
- पंचामृत स्नान – दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से स्नान
- वस्त्र अर्पण – लाल या पीले रंग के वस्त्र चढ़ाना
- श्रृंगार – सिंदूर, चंदन, फूल और आभूषण अर्पित करना
- भोग अर्पण – फल, मिठाई और पसंदीदा व्यंजन चढ़ाना
- दीप प्रज्वलन – घी या तिल के तेल का दीपक जलाना
शाम की पूजा में विशेष रूप से आरती करें और धूप-दीप से माता का स्वागत करें। पूरे दिन में कम से कम तीन बार – सुबह, दोपहर और शाम को दर्शन अवश्य करें।
मंत्र जाप और आरती की विधि
दुर्गा माता की पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व है। प्रतिदिन दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती के श्लोक या “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप करते समय रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना शुभ होता है।
मुख्य मंत्र:
- बीज मंत्र: “ॐ दुं दुर्गायै नमः”
- शक्ति मंत्र: “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता”
- प्रणाम मंत्र: “ॐ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते”
आरती करते समय घी या तिल तेल के पांच दीपक जलाएं। आरती दक्षिणावर्त दिशा में करें और सभी देवी माता के अंगों पर दीपक घुमाएं। आरती के दौरान “जय अम्बे गौरी” या “आरती कुंजबिहारी की” गाएं। आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें और माता का आशीर्वाद लें।
आरती की विधि:
- सबसे पहले गणेश जी की आरती करें
- फिर माता दुर्गा की सम्पूर्ण आरती करें
- घंटी और शंख बजाते रहें
- आरती के बाद फूल चढ़ाएं और प्रणाम करें
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री और तैयारी

पूजा सामग्री की पूरी सूची
दुर्गा पूजा के लिए सही सामग्री का होना बेहद जरूरी है। सबसे पहले आपको मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर चाहिए, जो पूजा का मुख्य आधार है। कलश, नारियल, आम के पत्ते, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी), केसर, चंदन, हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल), फूल माला, धूप-दीप, कपूर, नैवेद्य के लिए मिठाई और फल जरूरी हैं।
| पूजा सामग्री | मात्रा | विशेष नोट |
|---|---|---|
| कलश | 1 | तांबे या पीतल का हो |
| नारियल | 1 | पूरा और साफ |
| आम के पत्ते | 5-7 | ताज़े और हरे |
| फूल | 500 ग्राम | गुलाब, गेंदा, कमल |
| धूप-अगरबत्ती | 1 पैकेट | अच्ची गुणवत्ता की |
| दीया | 5-7 | मिट्टी के |
इसके अलावा लाल कपड़ा, चुनरी, कंघी, शीशा, बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, काजल जैसी श्रृंगार की वस्तुएं भी रखें। सुपारी, लौंग, इलायची, पान के पत्ते भी जरूरी हैं।
घर में मंडप सजावट के तरीके
मंडप की सजावट पूजा की पवित्रता बढ़ाती है। सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करके लाल कपड़ा बिछाएं। चार कोनों में बांस के डंडे गाड़कर आम के पत्तों की बंदनवार लगाएं। ऊपर रंग-बिरंगे कपड़े और फूलों की माला टांगें।
मां दुर्गा की मूर्ति को मंडप के बीच में स्थापित करें और उसके चारों तरफ दीए जलाएं। कलश को दाईं तरफ रखें और फूलों से सजाएं। मंडप के चारों तरफ रंगोली बनाकर उसमें दीए रखें। गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरें और खुशबूदार धूप जलाएं।
मंडप में रंग-बिरंगी झंडियां, बल्ब की लड़ी और चमकदार कलश भी लगा सकते हैं। दीवारों पर मां दुर्गा की तस्वीरें और श्लोक लगाएं।
प्रसाद तैयार करने की विधि
दुर्गा पूजा में प्रसाद का खास महत्व है। मां दुर्गा को खीर, हलवा, फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है। खीर बनाने के लिए दूध को उबालकर उसमें चावल, चीनी और इलायची डालें। सूजी का हलवा भी बना सकते हैं।
पारंपरिक प्रसाद में शामिल करें:
- खीर: चावल, दूध, चीनी से बनी
- हलवा: सूजी या आटे का
- पूरी: बिना नमक की
- चना: भुना हुआ
- फल: केला, सेब, संतरा
- मिठाई: गुड़ की जलेबी या लड्डू
प्रसाद बनाते समय पूरी तरह साफ-सफाई का ध्यान रखें। नहाकर साफ कपड़े पहनकर ही प्रसाद तैयार करें। नमक का इस्तेमाल न करें और प्याज-लहसुन से बचें।
पूजा स्थल की शुद्धता और सफाई
पूजा स्थल की सफाई आध्यात्मिक शुद्धता के लिए जरूरी है। पूजा से एक दिन पहले ही पूरा घर साफ कर लें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। फर्श को गोबर से लीपा जा सकता है या फिर गुलाब जल छिड़कें।
हवा में अच्छी खुशबू के लिए धूप-अगरबत्ती जलाएं। पूजा के बर्तन चमकाकर रखें और उन्हें गंगाजल से धो लें। घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्ते और गेंदे के फूलों की बंदनवार लगाएं।
पूजा के दौरान आसपास कोई गंदगी न हो और पूजा स्थल को बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें। दीए जलाने से पहले उनकी बत्ती को साफ कर लें और पर्याप्त तेल डालें।
दुर्गा पूजा की 5 सबसे खास और महत्वपूर्ण बातें

माता दुर्गा के 9 रूपों का महत्व
नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का अपना अलग महत्व है। पहले दिन शैलपुत्री की आराधना से जीवन में स्थिरता आती है, जबकि दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी का पूजन तप और संयम की शक्ति प्रदान करता है। तीसरे दिन चंद्रघंटा की कृपा से मन में शांति और साहस का संचार होता है।
कूष्मांडा माता की पूजा चौथे दिन करने से ब्रह्मांडीय ऊर्जा का लाभ मिलता है। पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना संतान प्राप्ति और उनकी सुरक्षा के लिए विशेष फलदायी है। छठे दिन कात्यायनी देवी का पूजन विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है।
सातवें दिन कालरात्रि का ध्यान सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है। आठवें दिन महागौरी की कृपा से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में पवित्रता आती है। अंतिम दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा से सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
हर रूप का अपना मंत्र, रंग और प्रसाद है जिसका सही प्रयोग करने से विशेष लाभ मिलता है।
पूजा के दौरान किए जाने वाले विशेष उपाय
दुर्गा पूजा के दौरान कुछ खास उपाय करने से माता की कृपा जल्दी प्राप्त होती है। सबसे पहले, लाल कपड़े पहनकर पूजा करने से माता प्रसन्न होती हैं क्योंकि लाल रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है।
पूजा के समय 108 बार दुर्गा चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा “या देवी सर्वभूतेषु” श्लोक का जाप करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
घी का दीपक जलाकर पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। पूजा के दौरान कपूर जलाना भी जरूरी है जो वातावरण को शुद्ध करता है।
विशेष लाभ के लिए:
- मंगलवार और शुक्रवार को सिंदूर चढ़ाएं
- केसर मिला दूध अर्पित करें
- चुनरी और आभूषण अर्पित करने से सुहाग की रक्षा होती है
- पान-सुपारी का भोग लगाना शुभ है
व्रत और नियमों के फायदे
नवरात्रि का व्रत रखने से शरीर और मन दोनों की शुद्धता होती है। यह व्रत सिर्फ धार्मिक मान्यता नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी फायदेमंद है। व्रत के दौरान फलाहार करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
मानसिक लाभ की बात करें तो व्रत रखने से एकाग्रता बढ़ती है और तनाव कम होता है। नियमित मंत्र जाप से दिमाग शांत रहता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है।
शारीरिक फायदे में शामिल है:
- वजन नियंत्रण में रहता है
- रक्त शुद्ध होता है
- त्वचा में निखार आता है
- पाचन क्रिया सुधरती है
आध्यात्मिक लाभ के रूप में व्रत रखने वाले की इच्छा शक्ति मजबूत होती है। जीवन में अनुशासन आता है और बुरी आदतों से छुटकारा मिलता है। माता की कृपा से घर में बरकत बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पूजा के बाद के अनुष्ठान और लाभ

विसर्जन की सही विधि
दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमा का विसर्जन सबसे महत्वपूर्ण चरण है। विसर्जन से पहले मां दुर्गा से आशीर्वाद मांगना और उनका धन्यवाद करना आवश्यक है। प्रतिमा को विसर्जित करने से पहले उसे चंदन, फूल और कुमकुम से सजाएं।
विसर्जन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। प्रतिमा को घर से निकालने से पहले आरती करें और परिवार के सभी सदस्य मां दुर्गा से अगले साल फिर आने का आग्रह करें। विसर्जन स्थल पर पहुंचकर पानी में प्रतिमा को धीरे-धीरे विसर्जित करें। जल में डुबाते समय “या देवी सर्वभूतेषु माँ दुर्गे नमो नमः” का जाप करें।
पूजा के आध्यात्मिक और व्यावहारिक फायदे
दुर्गा पूजा करने से मन में शांति और सकारात्मकता आती है। यह पूजा नकारात्मक विचारों को दूर करती है और जीवन में नई ऊर्जा भरती है। मां दुर्गा की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है।
आध्यात्मिक लाभ:
- मानसिक शुद्धता और एकाग्रता में वृद्धि
- नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
- आत्मविश्वास और साहस में बढ़ोतरी
- कष्टों से मुक्ति
व्यावहारिक लाभ:
- घर में धन और वैभव की वृद्धि
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में राहत
- व्यापार और नौकरी में उन्नति
- शत्रुओं से सुरक्षा
आशीर्वाद प्राप्त करने के उपाय
मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा के बाद कुछ खास उपाय करना चाहिए। रोज सुबह उठकर मां दुर्गा के मंत्र का जाप करें। घर में दुर्गा चालीसा का पाठ नियमित रूप से करें।
मंगलवार और शुक्रवार का व्रत रखने से मां दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है। लाल रंग के फूल चढ़ाना और लाल चुनरी अर्पित करना शुभ माना जाता है। शेर की मूर्ति या तस्वीर घर में रखने से मां का आशीर्वाद बना रहता है।
दैनिक अभ्यास:
- प्रातःकाल दुर्गा स्तोत्र का पाठ
- सायंकाल दीप जलाना
- मंगलवार को हनुमान जी की पूजा के साथ मां दुर्गा को भी याद करना
- नवरात्रि में उपवास रखना
पूजा के बाद दान और सेवा का महत्व
दुर्गा पूजा के बाद दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन दान करने से मां दुर्गा की कृपा और भी बढ़ जाती है। कन्या भोज कराना सबसे उत्तम माना जाता है।
गरीब परिवारों की मदद करना, वृद्धाश्रम या अनाथालय में सेवा करना मां को प्रिय है। मंदिर की सफाई करना या मंदिर में प्रसाद वितरण में सहायता करना भी पुण्य का काम है। पशु-पक्षियों को भोजन देना और पेड़-पौधे लगाना भी सेवा के अंतर्गत आता है।
दान की सूची:
- कन्याओं को भोजन कराना
- गरीबों को कपड़े देना
- शिक्षा के लिए सहायता
- चिकित्सा सहायता प्रदान करना
सेवा भाव से किया गया कोई भी कार्य मां दुर्गा को प्रसन्न करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

दुर्गा पूजा 2025 के शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि के साथ, आप माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पूजा की सभी जरूरी सामग्री और नियमों का पालन करके, आप इस पावन त्योहार का सच्चा आनंद उठा सकेंगे। खासकर ये 5 महत्वपूर्ण बातें जो हमने बताई हैं, वे आपकी पूजा को और भी फलदायी बनाएंगी।
इस बार दुर्गा पूजा को सिर्फ एक रस्म न बनाकर, दिल से करें और माँ दुर्गा से अपने परिवार की खुशी और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के बाद के अनुष्ठानों को भी ध्यान से पूरा करें ताकि आपको पूरा फायदा मिल सके। माँ दुर्गा का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहे!
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