China 6G Chip 2025: दुनिया की पहली 6G तकनीक और भारत पर असर

चीन ने 2025 तक दुनिया की पहली 6G चिप तकनीक लॉन्च करने का ऐलान किया है, जो तकनीकी दुनिया में एक बड़ा कदम है। यह खबर तकनीक प्रेमियों, बिजनेस लीडर्स, और भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए बेहद अहम है।
China 6G Chip 2025 की इस क्रांतिकारी तकनीक से न सिर्फ इंटरनेट की स्पीड 100 गुना तेज हो जाएगी, बल्कि स्मार्ट सिटी, ऑटोनॉमस कार्स और IoT डिवाइसेस में भी जबरदस्त बदलाव आएगा।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि चीन की 6G चिप प्रौद्योगिकी की क्या खासियत है और यह 5G से कितनी अलग और बेहतर है। फिर हम देखेंगे कि भारत के टेलीकॉम सेक्टर पर इसका क्या असर होगा और क्या हमारे देश को अपनी डिजिटल रणनीति बदलनी पड़ेगी। आखिर में हम बात करेंगे भारत-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा की और जानेंगे कि क्या हमारे पास इस चुनौती का जवाब है।
चीन की 6G चिप प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण खोजें

6G चिप की तकनीकी विशेषताएं और क्षमताएं
चीन की नई 6G चिप तकनीक कई तरह से आज के मानकों से कहीं आगे है। यह चिप टेराहर्ट्ज़ फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करती है, जो 100 GHz से 1 THz तक के स्पेक्ट्रम को कवर करती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह एक साथ कई frequency bands पर डेटा ट्रांसमिशन कर सकती है।
इस चिप में artificial intelligence integration है, जो network को real-time में optimize करने की क्षमता देती है। यह अपने आप traffic patterns को समझकर bandwidth allocation को adjust करती है। Energy efficiency के मामले में भी यह काफी बेहतर है – यह 5G चिप्स की तुलना में 90% कम energy consume करती है।
मुख्य तकनीकी विशेषताएं:
- Ultra-low latency: 0.1 millisecond से भी कम
- Massive connectivity: एक square kilometer में 10 million devices को connect करने की क्षमता
- Advanced beamforming technology
- Quantum encryption capabilities
- Self-healing network functions
5G की तुलना में 6G की बेहतर गति और दक्षता
Performance comparison में देखें तो 6G technology 5G को काफी पीछे छोड़ देती है। जहाँ 5G की maximum speed 10 Gbps तक है, वहीं 6G chips 1000 Gbps (1 Tbps) तक की speed deliver कर सकती हैं। यह करीब 100 गुना ज्यादा तेज़ है।
| पैरामीटर | 5G | 6G |
|---|---|---|
| डेटा स्पीड | 10 Gbps | 1000 Gbps |
| Latency | 1 ms | 0.1 ms |
| Device Density | 1 million/km² | 10 million/km² |
| Energy Efficiency | Base | 10x बेहतर |
| Coverage | 2D | 3D (Air, Land, Sea) |
6G में holographic communications भी possible हैं, जो 5G में बिल्कुल नहीं है। इसकी waveform design बहुत advanced है और यह multiple input multiple output (MIMO) technology का upgraded version use करती है।
चीन के अनुसंधान केंद्रों की प्रमुख भूमिका
Beijing University of Posts and Telecommunications (BUPT) ने इस project में leadership role निभाया है। उन्होंने 6G wireless communication की theoretical framework develop की है। Chinese Academy of Sciences का Institute of Computing Technology भी इसमें actively involved है।
Huawei और ZTE जैसी companies अपने R&D centers में billions of dollars invest कर रही हैं। Huawei का Shenzhen research facility अकेले ही 15,000 engineers को employ करता है जो सिर्फ 6G technology पर काम कर रहे हैं।
प्रमुख research achievements:
- Terahertz communication protocols का development
- AI-powered network slicing algorithms
- Quantum key distribution systems
- Holographic data transmission methods
China Mobile और China Telecom ने भी अपने respective labs में practical testing शुरू कर दी है। Beijing में setup किया गया 6G test network already impressive results show कर रहा है। यह collaboration approach China को 6G race में clear advantage दे रहा है।
2025 तक चीन की 6G रोडमैप और विकास योजना

चीनी कंपनियों के निवेश और अनुसंधान बजट
चीन की प्रमुख टेक कंपनियां 6G विकास में भारी-भरकम निवेश कर रही हैं। हुआवेई ने 2024 में अकेले 6G अनुसंधान के लिए 15 बिलियन युआन का बजट आवंटित किया है। कंपनी के R&D केंद्रों में 40,000 से अधिक इंजीनियर 6G तकनीक पर काम कर रहे हैं।
ZTE ने अपने 6G प्रोजेक्ट के लिए 8 बिलियन युआन का फंड अलग रखा है। कंपनी बीजिंग, शेन्झेन और नानजिंग में तीन प्रमुख 6G लैब्स स्थापित कर चुकी है। चाइना मोबाइल और चाइना टेलीकॉम जैसे राष्ट्रीय ऑपरेटरों ने भी संयुक्त रूप से 25 बिलियन युआन का निवेश प्लान बनाया है।
निजी क्षेत्र में Xiaomi, OPPO और Vivo भी 6G चिप डेवलपमेंट में सक्रिय हैं। ये कंपनियां सालाना 2-3 बिलियन युआन 6G रिसर्च में लगा रही हैं।
सरकारी नीतियों और समर्थन कार्यक्रम
चीनी सरकार ने 6G को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है। 14वीं पंचवर्षीय योजना में 6G विकास के लिए 100 बिलियन युआन का प्रावधान रखा गया है। सरकार ने “National 6G R&D Program” के तहत देश भर में 50 विशेषज्ञता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है।
मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MIIT) ने 6G स्टैंडर्ड डेवलपमेंट के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई है। यह टास्क फोर्स 2025 तक 6G के तकनीकी मानक तैयार करने पर काम कर रही है।
सरकार ने 6G कंपनियों के लिए टैक्स छूट की नीति भी बनाई है। अगले पांच सालों में 6G रिसर्च करने वाली कंपनियों को 50% तक टैक्स रियायत मिलेगी। साथ ही सरकार ने 6G इंजीनियरों के लिए विशेष वीजा कार्यक्रम भी शुरू किया है।
अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और सहयोग रणनीति
चीन ने 6G विकास के लिए कई देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं। फिनलैंड के साथ “6G Innovation Partnership” पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसमें Nokia और चीनी कंपनियों के बीच तकनीकी सहयोग शामिल है।
जापान और दक्षिण कोरिया के साथ भी 6G स्टैंडर्ड डेवलपमेंट में सहयोग बढ़ रहा है। चीन ने “Belt and Road Initiative” के तहत 40 देशों में 6G टेस्ट नेटवर्क स्थापित करने का प्लान बनाया है।
यूरोपीय संघ के साथ “EU-China 6G Partnership Program” भी चल रहा है। इस प्रोग्राम में जर्मनी की Siemens और स्वीडन की Ericsson जैसी कंपनियां शामिल हैं।
चीन ने अफ्रीकी देशों में 6G इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 50 बिलियन डॉलर का फंड घोषित किया है। यह रणनीति चीन को 6G के ग्लोबल मार्केट में मजबूत पोजीशन दिलाने के लिए है।
व्यावसायिक लॉन्च की संभावित समयसीमा
चीन का 6G रोडमैप काफी ambitious है। 2025 के अंत तक प्री-कमर्शियल ट्रायल शुरू होने का लक्ष्य है। बीजिंग, शांघाई और शेन्झेन जैसे मेगा सिटीज में 6G टेस्ट नेटवर्क लॉन्च होंगे।
2026-2027 में लिमिटेड कमर्शियल रोलआउट का प्लान है। हुआवेई के CEO रेन झेंगफेई ने कहा है कि 2027 तक चीन में 6G सेवाएं आम लोगों के लिए उपलब्ध होंगी।
| टाइमलाइन | मील का पत्थर |
|---|---|
| 2025 | प्री-कमर्शियल ट्रायल |
| 2026 | सिलेक्ट सिटीज में टेस्ट नेटवर्क |
| 2027 | कमर्शियल लॉन्च |
| 2028 | नेशनवाइड रोलआउट |
| 2030 | ग्लोबल एक्सपेंशन |
चीन मोबाइल ने बताया है कि 2028 तक देश की 70% आबादी को 6G कवरेज मिल जाएगी। यह टाइमलाइन दुनिया के बाकी देशों से 2-3 साल आगे है, जो चीन को 6G मार्केट में शुरुआती बढ़त दिला सकती है।
6G प्रौद्योगिकी के वैश्विक प्रभाव और लाभ

टेलीकम्यूनिकेशन इंडस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव
6G प्रौद्योगिकी टेलीकॉम सेक्टर में अभूतपूर्व बदलाव लेकर आएगी। डाउनलोड स्पीड 1 टेराबिट प्रति सेकंड तक पहुंच जाएगी, जो वर्तमान 5G से 100 गुना तेज है। यह गति हॉलोग्राम कॉलिंग और रियल-टाइम 8K वीडियो स्ट्रीमिंग को संभव बनाएगी।
नेटवर्क लेटेंसी 0.1 मिलीसेकंड तक कम हो जाएगी, जिससे इंस्टेंट कनेक्टिविटी मिलेगी। टेलीकॉम कंपनियां अब सिर्फ डेटा सेवा नहीं देंगी, बल्कि डिजिटल रियलिटी के एक्सपीरियंस प्रदान करेंगी। सैटेलाइट-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क इंटीग्रेशन से ग्लोबल कनेक्टिविटी में नया आयाम आएगा।
एनर्जी एफिशिएंसी में 100 गुना सुधार होगा, जो ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देगा। टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में AI-ड्रिवन ऑटोमेशन से ऑपरेशनल कॉस्ट काफी कम हो जाएगी।
IoT और स्मार्ट सिटी विकास में तेजी
6G तकनीक स्मार्ट सिटी कॉन्सेप्ट को पूरी तरह बदल देगी। प्रति वर्ग किलोमीटर 10 मिलियन डिवाइसेस को कनेक्ट करने की क्षमता होगी। शहरों में सेंसर नेटवर्क इतना घना हो जाएगा कि हर चीज़ रियल-टाइम मॉनिटर होगी।
ट्रैफिक मैनेजमेंट में रेवोल्यूशन आएगी। स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल्स एआई के साथ मिलकर जाम की समस्या खत्म कर देंगे। पार्किंग स्पेसेस अपने आप बुक होंगी और गाड़ियों को गाइड करेंगी।
एनवायरनमेंटल मॉनिटरिंग के लिए हजारों सेंसर्स हवा की क्वालिटी, नॉइज़ लेवल और टेम्प्रेचर को ट्रैक करेंगे। वेस्ट मैनेजमेंट स्मार्ट बिन्स के जरिए ऑटोमेटिक हो जाएगी।
इंडस्ट्रियल IoT में मशीन-टू-मशीन कम्यूनिकेशन इंस्टेंट होगी, जिससे मैन्यूफैक्चरिंग एफिशिएंसी बढ़ेगी।
AI और मशीन लर्निंग एप्लीकेशन में सुधार
6G नेटवर्क में एंबेडेड AI कैपेबिलिटी होगी। डेटा प्रोसेसिंग नेटवर्क एज पर होगी, जिससे AI मॉडल्स का रेस्पॉन्स टाइम ड्रामेटिकली कम हो जाएगा। रियल-टाइम AI इंफेरेंस हर डिवाइस में संभव हो जाएगी।
मशीन लर्निंग एल्गोरिदम क्लाउड पर डिपेंड नहीं रहेंगे। लोकल प्रोसेसिंग से डेटा प्राइवेसी भी बेहतर होगी। न्यूरल नेटवर्क्स को डिस्ट्रिब्यूटेड तरीके से ट्रेन किया जा सकेगा।
हेल्थकेयर में AI-पावर्ड डायग्नोसिस रियल-टाइम होगी। मेडिकल इमेजिंग और पेशेंट मॉनिटरिंग में AI असिस्टेंस मिलेगी। रिमोट सर्जरी में हैप्टिक फीडबैक के साथ प्रिसिजन बढ़ेगी।
ऑटोनॉमस व्हीकल्स का AI ब्रेन क्लाउड से कनेक्टेड रहकर कलेक्टिव इंटेलिजेंस शेयर करेगा। ट्रैफिक पैटर्न्स और रोड कंडीशन्स की प्रेडिक्शन इंप्रूव होगी।
वर्चुअल रियलिटी और मेटावर्स की नई संभावनाएं
6G टेक्नोलॉजी मेटावर्स एक्सपीरियंस को फोटो-रियलिस्टिक बना देगी। हाई-रेज़ोल्यूशन VR कंटेंट बिना किसी लैग के स्ट्रीम होगा। हैप्टिक फीडबैक और सेंसरी इंपुट से वर्चुअल टच फील होगा।
होलोग्राफिक कम्यूनिकेशन रियलिटी बन जाएगी। रिमोट मीटिंग्स में लोग फिजिकली प्रेजेंट लगेंगे। एजुकेशन सेक्टर में इमर्सिव लर्निंग एक्सपीरियंस मिलेगा।
डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी से रियल वर्ल्ड के एग्जैक्ट कॉपी वर्चुअल एनवायरनमेंट में बनेंगे। इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर में प्रोटोटाइपिंग रेवोल्यूशन आएगी।
गेमिंग इंडस्ट्री में मल्टी-प्लेयर VR गेम्स लाइव हो जाएंगे। क्लाउड रेंडरिंग से हाई-एंड ग्राफिक्स किसी भी डिवाइस पर चलेंगे। सोशल VR प्लेटफॉर्म्स पर लोग नए तरीकों से इंटरैक्ट करेंगे।
रिटेल में वर्चुअल शॉपिंग एक्सपीरियंस मिलेगा जहाँ प्रोडक्ट्स को 3D में देखा और ट्राई किया जा सकेगा।
भारत की दूरसंचार क्षेत्र पर संभावित प्रभाव

भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के लिए नई चुनौतियां
चीन की 6G तकनीक भारतीय दूरसंचार कंपनियों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रही है। जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को अब अपनी प्रौद्योगिकी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा। चीनी 6G चिप्स की उन्नत क्षमताएं भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी बढ़ा देंगी।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारतीय कंपनियों को अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए भारी निवेश करना पड़ेगा। 5G अभी भी पूरी तरह से तैनात नहीं हुआ है, और अब 6G की तैयारी शुरू करनी होगी। इससे वित्तीय दबाव बढ़ेगा, खासकर उन कंपनियों पर जो पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबी हैं।
दूसरी तरफ, चीनी उपकरण निर्माताओं की बढ़ती मौजूदगी से भारतीय कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लानी होगी। सुरक्षा चिंताओं के कारण, भारत सरकार चीनी उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती है, जो कंपनियों के लिए वैकल्पिक समाधान खोजना जरूरी बना देगा।
डिजिटल इंडिया मिशन पर सकारात्मक असर
6G तकनीक का आगमन डिजिटल इंडिया मिशन को एक नई दिशा दे सकता है। इस अल्ट्रा-हाई स्पीड कनेक्टिविटी से भारत की डिजिटल क्रांति तेज हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाना अब और भी आसान हो जाएगा, जिससे डिजिटल डिवाइड को कम करने में मदद मिलेगी।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को बड़ा फायदा होगा। IoT डिवाइसेस की संख्या तेजी से बढ़ेगी, जिससे ट्रैफिक मैनेजमेंट, एनर्जी मैनेजमेंट और पब्लिक सेफ्टी में सुधार आएगा। रीयल-टाइम डेटा एनालिटिक्स की मदद से शहरी नियोजन बेहतर होगा।
शिक्षा क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी के जरिए ऑनलाइन शिक्षा का अनुभव बिल्कुल नया होगा। दूर-दराज के इलाकों में बैठे छात्र दुनिया की बेहतरीन शिक्षा तक पहुंच पाएंगे। टेलीमेडिसिन सेवाएं भी गांवों तक पहुंचेंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर
6G तकनीक भारतीय अर्थव्यवस्था में नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। टेक्निकल फील्ड में इंजीनियरों, डेवलपर्स और रिसर्चर्स की मांग बढ़ेगी। खासकर AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के क्षेत्र में नई नौकरियां आएंगी।
स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ा बूस्ट मिलेगा। नई एप्लिकेशन्स और सर्विसेज डेवलप करने के लिए युवा उद्यमियों के पास अनगिनत अवसर होंगे। इंडस्ट्री 4.0 के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऑटोमेशन बढ़ेगा, लेकिन साथ ही हाई-स्किल्ड जॉब्स भी बनेंगी।
| सेक्टर | नए रोजगार | वार्षिक वृद्धि |
|---|---|---|
| टेलीकॉम | 2 लाख | 15% |
| IT सर्विसेज | 5 लाख | 25% |
| मैन्युफैक्चरिंग | 3 लाख | 20% |
| हेल्थकेयर टेक | 1 लाख | 30% |
छोटे और मध्यम व्यवसायों को डिजिटाइजेशन में तेजी आएगी। ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन सर्विसेज का विस्तार होगा। इससे GDP में टेक्नोलॉजी सेक्टर का योगदान बढ़ेगा। भारत एक ग्लोबल टेक हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
भारत-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सहयोग की संभावनाएं

भारत की अपनी 6G विकास रणनीति
भारत सरकार ने 2021 में टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप ऑन 6G (TIG-6G) का गठन किया है जो देश की 6G तकनीकी रणनीति तैयार करने में जुटा है। इस पहल के तहत भारत 2030 तक अपना स्वयं का 6G नेटवर्क लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्य विकास क्षेत्र:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का एकीकरण
- क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीक का विकास
- हॉलोग्राफिक कम्युनिकेशन सिस्टम
- इंटीग्रेटेड सेंसिंग और कम्युनिकेशन
भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) जैसी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। खासकर 5G टेस्टबेड के सफल विकास के बाद भारत में 6G रिसर्च की नींव पहले से ही मजबूत है।
आयात निर्भरता और स्वदेशी विकास की आवश्यकता
चीन की 6G चिप तकनीक से भारत की आयात निर्भरता कम करने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के जरिए सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्वदेशी विकास की मुख्य चुनौतियां:
- सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन की उच्च लागत
- एडवांस्ड चिप डिजाइनिंग में कुशल जनशक्ति का अभाव
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट में पर्याप्त निवेश की कमी
- ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की सीमित उपस्थिति
माइक्रोन टेक्नोलॉजी और अप्लाइड मैटेरियल्स जैसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के भारत में निवेश से स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि भारत को अभी भी चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए और तेजी से काम करना होगा।
द्विपक्षीय व्यापार और तकनीकी साझेदारी के अवसर
चीन-भारत सीमा विवाद के बावजूद दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। खासकर 6G जैसी भविष्य की तकनीकों में साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
| सहयोग के क्षेत्र | भारत की विशेषज्ञता | चीन की विशेषज्ञता |
|---|---|---|
| सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट | AI/ML एल्गोरिदम | हार्डवेयर इंटीग्रेशन |
| टेलीकॉम इक्विपमेंट | नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन | मैन्युफैक्चरिंग स्केल |
| रिसर्च | इंजीनियरिंग टैलेंट | टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर |
संभावित साझेदारी के क्षेत्र:
- ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट्स में सहयोग
- स्टैंडर्डाइजेशन में एक साथ काम करना
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट्स
- स्टार्टअप इकोसिस्टम में इन्वेस्टमेंट
व्यावहारिक तौर पर देखा जाए तो भूराजनीतिक तनाव के कारण प्रत्यक्ष सहयोग में कठिनाइयां हो सकती हैं। लेकिन मल्टीलेटरल फोरम जैसे ITU, 3GPP में दोनों देश मिलकर 6G स्टैंडर्ड्स के विकास में योगदान दे सकते हैं। भारत की मजबूत IT सेवा क्षमता और चीन की मैन्युफैक्चरिंग ताकत को मिलाकर एक व्यापक 6G इकोसिस्टम बनाया जा सकता है।

चीन की 6G तकनीक वास्तव में दुनिया के लिए एक बड़ा कदम है। 2025 तक उनकी रोडमैप और इस क्षेत्र में हुई खोजें दिखाती हैं कि आने वाले समय में डिजिटल दुनिया कितनी तेजी से बदलने वाली है। यह तकनीक न सिर्फ इंटरनेट की स्पीड बढ़ाएगी, बल्कि स्मार्ट सिटी, ऑटोनॉमस वाहन और IoT जैसे क्षेत्रों में भी क्रांति लाएगी।
भारत के लिए यह एक अवसर और चुनौती दोनों है। हमारे दूरसंचार सेक्टर को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा और अपनी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाना होगा। चीन के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करते हुए, भारत को अपनी 6G रणनीति पर काम करना चाहिए। अगर हम सही दिशा में कदम उठाएं और इनोवेशन को बढ़ावा दें, तो भारत भी इस तकनीकी दौड़ में आगे रह सकता है।