केदारनाथ रोपवे अदाणी ग्रुप द्वारा केदारनाथ धाम की चढ़ाई आसान बनाने वाले रोपवे प्रोजेक्ट का उद्घाटन, श्रद्धालुओं की सुविधा पर चर्चा

केदारनाथ रोपवे अदाणी ग्रुप द्वारा केदारनाथ धाम की चढ़ाई आसान बनाने वाले रोपवे प्रोजेक्ट का उद्घाटन: श्रद्धालुओं की सुविधा पर चर्चा

केदारनाथ रोपवे अदाणी ग्रुप द्वारा केदारनाथ धाम की चढ़ाई आसान बनाने वाले रोपवे प्रोजेक्ट का उद्घाटन: श्रद्धालुओं की सुविधा पर चर्चा केदारनाथ/देहरादून, 15 अक्टूबर 2025 (विशेष संवाददाता): हिमालय की गोद में बसा भगवान शिव का प्रसिद्ध धाम केदारनाथ अब श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगा। अदाणी ग्रुप द्वारा विकसित सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट का औपचारिक उद्घाटन आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में किया गया। यह प्रोजेक्ट, जो राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम ‘पर्वतमाला परियोजना’ के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है, न केवल 9 घंटे की कठिन पैदल चढ़ाई को महज 36 मिनट में बदल देगा, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों जैसे कमजोर वर्गों के लिए तीर्थयात्रा को सुरक्षित व सुगम बना देगा। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “केदारनाथ धाम की कठिन चढ़ाई अब आसान होगी। अदाणी समूह श्रद्धालुओं की यात्रा को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए यह रोपवे बना रहा है। इस पुण्य कार्य का हिस्सा बनना हमारे लिए गर्व की बात है। महादेव सब पर अपनी कृपा बनाए रखें। जय बाबा केदारनाथ!”

यह उद्घाटन समारोह सोनप्रयाग में आयोजित हुआ, जहां सैकड़ों श्रद्धालु, स्थानीय ग्रामीण और सरकारी अधिकारी मौजूद थे। रोपवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, और अनुमान है कि यह अगले 6 वर्षों में पूरा हो जाएगा। एक बार चालू होने के बाद, अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) इसे 29 वर्षों तक संचालित करेगी। प्रोजेक्ट की कुल लागत 4,081 करोड़ रुपये है, जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) द्वारा सितंबर 2025 में एआईएल को लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्रदान किया गया था। यह प्रोजेक्ट न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आइए, इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।

प्रोजेक्ट का अवलोकन: आधुनिक तकनीक से जुड़ रहा प्राचीन विश्वास

केदारनाथ धाम, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर (11,755 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। हर वर्ष यहां लगभग 20 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन सोनप्रयाग से धाम तक की 16-22 किलोमीटर की दूरी पार करने के लिए पैदल चढ़ाई या खच्चर की सवारी ही एकमात्र विकल्प रहा है। यह यात्रा न केवल शारीरिक रूप से कठिन है, बल्कि मौसम की मार (भारी बारिश, भूस्खलन) के कारण जोखिम भरी भी साबित होती है। 2013 की आपदा के बाद से तो चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

ऐसे में, रोपवे प्रोजेक्ट एक वरदान की तरह है। यह 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे सोनप्रयाग को सीधे केदारनाथ से जोड़ेगा। प्रति घंटे 1,800 यात्रियों की क्षमता वाला यह रोपवे 3S (तीन एस) तकनीक पर आधारित होगा—जिसमें स्ट्रैंडेड कंडक्टर, सपोर्टेड कैरियर और सेफ्टी सिस्टम शामिल हैं। इससे यात्रा समय न केवल घटेगा, बल्कि आपात स्थिति में त्वरित बचाव कार्य भी संभव हो सकेगा। गौतम अदाणी ने इसे “भक्ति और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच एक पुल” करार दिया है। उद्घाटन समारोह में अदाणी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने एक डेमो मॉडल प्रदर्शित किया, जिसमें रोपवे के केबिन दिखाए गए—ये पूरी तरह एयर-कंडीशंड होंगे और विकलांग व्यक्तियों के लिए भी अनुकूलित।

प्रोजेक्ट का निर्माण अदाणी एंटरप्राइजेज की रोड्स, मेट्रो, रेल एंड वाटर (आरएमआरडब्ल्यू) डिवीजन द्वारा किया जा रहा है। यह ग्रुप का पहला रोपवे वेंचर है, जो 2018 से सड़क एवं हाईवे सेक्टर में सक्रिय अदाणी की विशेषज्ञता को दर्शाता है। कंपनी के पास वर्तमान में 14 प्रोजेक्ट हैं, जो 5,000 से अधिक लेन किलोमीटर को कवर करते हैं। निर्माण के दौरान स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता से रोजगार दिया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

उद्घाटन समारोह: आस्था और विकास का संगम

आज का उद्घाटन समारोह सोनप्रयाग के हेलीपैड मैदान पर आयोजित किया गया, जहां भगवान शिव के मंत्रोच्चार के बीच रीति-रिवाज पूरे किए गए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और कहा, “यह प्रोजेक्ट केदारनाथ यात्रा को क्रांतिकारी रूप देगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस रहेगा।” उन्होंने अदाणी ग्रुप को धन्यवाद देते हुए जोर दिया कि रोपवे से पैदल मार्ग पर दबाव कम होगा, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन बना रहेगा।

समारोह में सांसदों, विधायकों और बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सदस्यों ने भाग लिया। बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि रोपवे से यात्रा के दौरान दर्शन का समय बढ़ेगा, और श्रद्धालु अधिक आराम से पूजा-अर्चना कर सकेंगे। एक छोटे से सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने जागर गीत गाए, जो हिमालयी संस्कृति का प्रतीक था। गौतम अदाणी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। समारोह के अंत में, एक प्रतीकात्मक ‘शिलान्यास’ पूर्ण किया गया, जो निर्माण की शुरुआत का संकेत था।

श्रद्धालुओं की सुविधा: कैसे बदलेगी यात्रा की तस्वीर?

रोपवे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाना है। वर्तमान में, सोनप्रयाग से केदारनाथ तक की यात्रा में औसतन 8-9 घंटे लगते हैं, जिसमें ऊंचाई के कारण सांस लेने में तकलीफ, थकान और स्वास्थ्य जोखिम शामिल हैं। बुजुर्ग और बच्चे अक्सर यात्रा से वंचित रह जाते हैं। रोपवे से यह समय घटकर 36 मिनट हो जाएगा, जिससे दर्शन का समय दोगुना हो सकता है।

  • सुरक्षा पहलू: रोपवे में उन्नत सेंसर और इमरजेंसी ब्रेक सिस्टम होंगे। मौसम खराब होने पर भी संचालन संभव होगा, जो पैदल यात्रा में असंभव है। 2013 की आपदा जैसी घटनाओं में बचाव कार्य तेज होगा।
  • समावेशिता: विशेष केबिन विकलांगों और गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित। प्रति घंटे 1,800 यात्रियों की क्षमता से भीड़भाड़ कम होगी।
  • पर्यावरण संरक्षण: रोपवे इलेक्ट्रिक पावर पर चलेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य रहेगा। पैदल पथ पर ट्रैफिक कम होने से वन्यजीवों का संरक्षण होगा।
  • अतिरिक्त सुविधाएं: स्टेशनों पर मेडिकल एड, रेस्ट एरिया और हेली सर्विस इंटीग्रेशन। टिकटिंग डिजिटल होगी, जिससे ऑनलाइन बुकिंग आसान हो जाएगी।

श्रद्धालुओं से बातचीत में एक बुजुर्ग यात्री ने कहा, “पहले चढ़ाई सोचकर ही डर लगता था। अब तो महादेव के दर्शन सबके लिए आसान हो जाएंगे।” एक युवा तीर्थयात्री ने जोड़ा, “यह प्रोजेक्ट आस्था को आधुनिकता से जोड़ेगा, बिना परंपरा को छुए।”

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: उत्तराखंड के लिए नया अध्याय

यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। पर्यटन क्षेत्र, जो राज्य की जीडीपी का 40% योगदान देता है, को नया बल मिलेगा। अनुमान है कि रोपवे से सालाना 5-10 लाख अतिरिक्त पर्यटक आकर्षित होंगे। निर्माण चरण में 2,000 से अधिक स्थानीय रोजगार सृजित होंगे, जबकि संचालन के दौरान 500 स्थायी नौकरियां। अदाणी ग्रुप ने वादा किया है कि 70% ठेका स्थानीय ठेकेदारों को दिया जाएगा।

सामाजिक रूप से, यह महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाए जाएंगे, जैसे रोपवे मेंटेनेंस ट्रेनिंग। पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) में सुनिश्चित किया गया है कि हिमालयी पारिस्थितिकी पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। गौतम अदाणी ने कहा, “यह प्रोजेक्ट लाखों की आस्था का सम्मान करता है, साथ ही उत्तराखंड के लोगों के लिए अवसर पैदा करता है।”

चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं

हालांकि प्रोजेक्ट उत्साहजनक है, चुनौतियां भी हैं। हिमालयी इलाके में निर्माण के दौरान भूस्खलन का खतरा, मौसमी बाधाएं और स्थानीय विरोध (पर्यावरण चिंताओं के कारण) संभावित हैं। अदाणी ग्रुप ने इनके लिए विशेषज्ञ टीम तैनात की है। भविष्य में, यह रोपवे बद्रीनाथ और गंगोत्री जैसे अन्य धामों से जुड़ सकता है, जिससे चार धाम यात्रा एकीकृत हो जाए।

केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने उद्घाटन पर बधाई देते हुए कहा, “पर्वतमाला योजना के तहत 8 रोपवे प्रोजेक्ट स्वीकृत हैं, और केदारनाथ इसका प्रमुख हिस्सा है।” विपक्ष ने भी सराहना की, लेकिन पारदर्शिता पर जोर दिया।

निष्कर्ष: भक्ति का नया द्वार

अदाणी ग्रुप का यह रोपवे प्रोजेक्ट केदारनाथ यात्रा को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहां एक ओर यह श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगा, वहीं दूसरी ओर विकास और परंपरा के संतुलन का उदाहरण बनेगा। जैसा कि गौतम अदाणी ने कहा, “यह केवल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भक्ति का पुल है।” आने वाले वर्षों में, जब रोपवे चालू होगा, तो लाखों श्रद्धालु महादेव के दर्शन को नई आसानी से कर सकेंगे। जय बाबा केदारनाथ!

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