जैसलमेर बस हादसा: 12 लोगों की दर्दनाक मौत, भयानक टक्कर ने सबको झकझोर दिया

जैसलमेर बस हादसा: 20 लोगों की दर्दनाक मौत, भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया

जैसलमेर, 15 अक्टूबर 2025 (विशेष संवाददाता): राजस्थान के रेगिस्तानी जिले जैसलमेर में मंगलवार दोपहर एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने न केवल स्थानीय निवासियों को बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक निजी एसी स्लीपर बस अचानक आग की चपेट में आ गई, जो कुछ ही पलों में एक जलता हुआ गोला बन गई। इस भयावह अग्निकांड में कम से कम 20 लोगों की जिंदगी जलकर राख हो गई, जबकि 16 अन्य यात्री गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के समय बस में 57 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे। यह घटना जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर थईयात गांव के पास, वार म्यूजियम के निकट दोपहर करीब 3:30 बजे घटी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस के पिछले हिस्से से धुआं उठते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कई लोग बाहर निकलने के प्रयास में फंस गए। दरवाजे गर्मी से लॉक हो गए, और यात्रियों को छटपटाते हुए जिंदा जलने का दर्दनाक मंजर देखने को मिला।

यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी का प्रतीक बन गया है। दिवाली के त्योहार की तैयारियों के बीच कई परिवार अपने घर लौट रहे थे, लेकिन किस्मत ने उनका साथ छोड़ दिया। एक ही परिवार के पांच सदस्यों समेत कई निर्दोषों की मौत ने पूरे समाज को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया। क्या यह शॉर्ट सर्किट का नतीजा था? क्या बस का हालिया मॉडिफिकेशन जिम्मेदार था? या फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी? इन सवालों के बीच प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। आइए, इस दर्दनाक घटना की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।

हादसे का क्रम: धुएं से आग के गोले तक का खौफनाक सफर

मंगलवार की दोपहर जैसलमेर शहर में सामान्य दिन था। सूरज की तेज किरणें रेत के टीले चूम रही थीं, और हाईवे पर वाहनों की आवाजाही चल रही थी। दोपहर करीब 3 बजे, केके ट्रैवल्स की एक निजी एसी स्लीपर बस जैसलमेर बस स्टैंड से जोधपुर के लिए रवाना हुई। बस में सवार 57 यात्री विभिन्न कारणों से यात्रा कर रहे थे—कुछ दिवाली की छुट्टियां मनाने, कुछ प्री-वेडिंग शूट के लिए, तो कुछ रोजगार के सिलसिले में। बस का ड्राइवर रामलाल मीणा ने बताया कि बस जैसलमेर से महज 20 किलोमीटर दूर थईयात गांव के पास पहुंची ही थी कि अचानक पिछले हिस्से से काला धुआं निकलने लगा। “मैंने ब्रेक लगाया और यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन आग फैलने की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही सेकंडों में पूरी बस लपटों में लिपट गई,” ड्राइवर ने अस्पताल पहुंचने पर बताया।

प्रत्यक्षदर्शी किसान हरि सिंह ने बताया, “मैं खेत में काम कर रहा था जब हाईवे पर बस रुक गई। धुआं देखकर मैं दौड़ा, लेकिन तब तक आग इतनी भयानक हो चुकी थी कि बस को छूना भी मुश्किल था। यात्रियों की चीखें सुनाई दे रही थीं—’बचाओ, आग लग गई!’ लेकिन दरवाजे गर्मी से पिघलने लगे थे, और खिड़कियां जाम हो गईं। कुछ लोग कूदकर बाहर आए, लेकिन कई अंदर ही फंस गए।” फायर ब्रिगेड की टीम को सूचना मिलते ही 10 मिनट में मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। असिस्टेंट फायर ऑफिसर पृथ्वीपाल सिंह राठौर ने कहा, “जब हम पहुंचे, तो कोई जीवित व्यक्ति नहीं मिला। अनुमान है कि 20 से अधिक लोग अंदर फंसे थे। आग बुझाने में हमें एक घंटा लग गया।”

बचाव कार्य में स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) और सेना के जवान भी शामिल हुए। सेना के गोला-बारूद डिपो के निकट होने के कारण सैनिकों ने तुरंत सहायता पहुंचाई। 16 घायलों को पहले जैसलमेर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी हालत गंभीर होने पर जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल रेफर कर दिया गया। इनमें से कई 50-70 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं, और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। एक घायल यात्री मगन लाल ने बताया, “मैं अपनी बेटी के साथ प्री-वेडिंग शूट के लिए जा रहा था। आग लगते ही मैं खिड़की तोड़कर कूदा, लेकिन मेरी बेटी… वह अंदर ही रह गई।”

मृतकों की पहचान: एक परिवार का पूरा सफाया, कई अनजान चेहरे

हादसे की सबसे दर्दनाक कहानी है लवारन गांव निवासी महेंद्र मेघवाल की। महेंद्र जैसलमेर में सेना के गोला-बारूद डिपो में कार्यरत थे और इंद्रा कॉलोनी में किराए के मकान में परिवार के साथ रहते थे। वह अपनी पत्नी पार्वती, दो बेटियों खुशबू (12) और दीक्षा (8), तथा बेटे राहुल (5) के साथ दिवाली मनाने गांव लौट रहे थे। बस का सीसीटीवी फुटेज और टिकट रिकॉर्ड से उनकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है। गांव में शोक की लहर दौड़ गई। महेंद्र के भाई कस्तूर सिंह ने रोते हुए कहा, “भाई बस चार दिन पहले ही घर फोन करके कह रहे थे कि दिवाली पर सब साथ मनाएंगे। अब पूरा परिवार ही चला गया। बस से केवल 16 लोग ही बाहर निकले, बाकी सब…।” DNA टेस्ट के जरिए शवों की पहचान की प्रक्रिया शुरू हो गई है, क्योंकि आग की तीव्रता से शव बुरी तरह जले हुए हैं।

अन्य मृतकों में जोधपुर के बालेसर क्षेत्र के तीन बच्चे, चार महिलाएं और कई बुजुर्ग शामिल हैं। एक यात्री, रमेश जोशी, जोधपुर के व्यापारी थे, अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहे थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार टूट गया। कुल 20 मौतों की पुष्टि पोकरण के बीजेपी विधायक श्याम सिंह ने की है। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सूचित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

कारणों की जांच: शॉर्ट सर्किट, जुगाड़ मॉडिफिकेशन या लापरवाही?

प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। बस हाल ही में नॉर्मल से एसी स्लीपर में मॉडिफाई की गई थी। यह बस 1 अक्टूबूर 2025 को रजिस्टर्ड हुई थी, और 9 अक्टूबर को ऑल इंडिया परमिट मिला था। यह उसका चौथा फेरा था। विशेषज्ञों का कहना है कि मॉडिफिकेशन के दौरान वायरिंग में खराबी हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में पटाखों की वजह से आग लगने की आशंका जताई गई है, क्योंकि दिवाली नजदीक होने से यात्रियों के पास पटाखे हो सकते थे। हालांकि, पुलिस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वायरिंग जांच का मुख्य फोकस है।

ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बस में फायर एक्सटिंग्विशर थे, लेकिन वे अपर्याप्त साबित हुए। दरवाजों का लॉक सिस्टम गर्मी से फेल हो गया, जो स्लीपर बसों में आम समस्या है। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “आंकड़े छुपाए जा रहे हैं। राजस्थान में सड़क हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा। जुगाड़ वाली बसें मौत का कारण बन रही हैं।” परिवहन मंत्री ने जांच समिति गठित करने की घोषणा की है।

प्रतिक्रियाएं और शोक संदेश: देश भर से संवेदनाएं

इस हादसे ने राजनीतिक गलियारों को भी हिला दिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जोधपुर के अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “यह हादसा हृदयविदारक है। घायलों के इलाज के लिए हर संभव सहायता दी जाएगी।” सीएम ने मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजे की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “जैसलमेर हादसे से व्यथित हूं। मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे “पीड़ादायक” बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “यह दुखद घटना सड़क सुरक्षा पर सवाल उठाती है। सरकार तत्काल कदम उठाए।” बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भी शोक व्यक्त किया, “मेरी प्रार्थनाएं पीड़ितों के साथ हैं।” सोशल मीडिया पर #JaisalmerBusTragedy ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग सुरक्षा मानकों पर बहस कर रहे हैं।

घायलों का हाल: पुरानी एम्बुलेंस पर सवाल, ग्रीन कॉरिडोर की कमी

घायलों को जोधपुर ले जाते समय एम्बुलेंस की बदहाली सामने आई। एक परिजन ने बताया, “एम्बुलेंस पुरानी थी, स्पीड कम थी, और ऑक्सीजन की कमी थी। ग्रीन कॉरिडोर का वादा किया गया, लेकिन रास्ते में जाम लगा रहा।” जिला कलेक्टर ने सफाई दी कि प्रयास किए गए, लेकिन संसाधनों की कमी थी। जोधपुर के एमजी अस्पताल में 12 घायल भर्ती हैं, जिनमें से चार की हालत नाजुक है। डॉक्टरों ने कहा, “झुलसान के कारण इंफेक्शन का खतरा है। प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ेगी।”

पृष्ठभूमि: राजस्थान में सड़क हादसों का काला अध्याय

राजस्थान सड़क हादसों के मामले में अग्रणी राज्य है। 2024 में 18,000 से अधिक हादसे हुए, जिनमें 10,000 मौतें दर्ज की गईं। जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर ही पिछले साल तीन बड़े हादसे हुए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि जुगाड़ मॉडिफिकेशन, ओवरलोडिंग और खराब रखरखाव मुख्य कारण हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 70 प्रतिशत निजी बसें सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करतीं। यह हादसा सरकार के लिए चेतावनी है—क्या अब सख्ती बरती जाएगी?

भविष्य की उम्मीदें: सुरक्षा में सुधार की मांग

यह हादसा यात्रियों की सुरक्षा पर बहस छेड़ रहा है। परिवहन विभाग को बसों में आधुनिक फायर सिस्टम अनिवार्य करने की मांग उठ रही है। एनजीटी ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच की मांग की है। परिवारों की चीखें अभी गूंज रही हैं—क्या यह अंतिम हादसा होगा?’

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